हिंदी – लक्ष्मण सिंह त्यागी रीतेश

  • Post author:Manisha Tyagi

हिंदी

रग रग में हिंदी , नस नस में हिंदी ।
चाहे हो हिंदू , चाहे हो सिंधी ।।

बचपन से बोला , हर शब्द तौला ।
हर राज़ खोला , हर गाली दी गंदी ।।
रग रग

है देवों की बानी , हम सबकी जुबानी ।
नानी की कहानी , ना मंहगी है मंदी ।।
रग रग

इसे है बढाना , है सबको पढाना ।
शिखर पर चढ़ाना , जैसे मां की बिंदी ।।
रग रग

लक्ष्मण सिंह त्यागी रीतेश

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