विछोह की पीड़ा

  • Post author:Editor

kavi saurabh

पता नही किस शहर में,
किस गली तुम चली गई।
मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई ।
पता नही हम किस मोड़ पर
फिर कभी मिल पाएँगे ।
इस अनूठी दुनिया में फिर
किस तरह से संभल पाएँगे ।
पता नही तेरे बिन हम,
जी पाएँगे या मर जाएँगे ।
हम बिछड़ गए उस दिन,जिस दिन
तुम मुझसे मिलने वाली थी
मै तुमसे मिलने वाला था ।
इस अंधी दुनिया ने कभी
हमको समझा ही नही ।
काश समझ पाती दुनिया,
तो हम कभी बिछड़ते ही नही ।
प्यार करते थे हम तुमसे,
पर कभी कह ही न पाएँ ।
आज भी सोचता हूँ की,
काश वो दिन वापस लौट आए ।
बहुत समय लगा दिया हमने इजहार में ।
कब तक भटकेंगे हम तेरे इन्तजार में ।
हम बिछड़ गए थे उस दिन,जिस दिन,
तुम मुझसे मिलने वाली थी,
मै तुमसे मिलने मिलने वाला था ।

 

-©®सौरभ कुमार ठाकुर

बाल कवि और लेखक
मुजफ्फरपुर, बिहार
संपर्क:- 8800416537


उड़ान हिन्दी चैनल को YouTube पर सब्सक्राइब करें


कॉपीराइट सूचना © उपरोक्त रचना / आलेख से संबंधित सर्वाधिकार रचनाकार / मूल स्रोत के पास सुरक्षित है। उड़ान हिन्दी पर प्रकाशित किसी भी सामग्री को पूर्ण या आंशिक रूप से रचनाकार या उड़ान हिन्दी की लिखित अनुमति के बिना सोशल मीडिया या पत्र-पत्रिका या समाचार वेबसाइट या ब्लॉग में पुनर्प्रकाशित करना वर्जित है।