मायाजाल | जौली अंकल

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आज की इस तनाव भरी जिदंगी में किसी भी व्यक्ति से बात की जायें तो वो किसी न किसी उलझन का शिकार दिखाई देता हैं। कुछ लोग तो यहा तक कहने लगे हैं जिदंगी ‘जी का जंजाल’ बन कर रह गई हैं। इतनी परेशानियों के बीच जीते-जीते बहुत सारे लोगों की सोचने और समझने की शक्ति भी ठीक से काम नही करती। शायद इसी कारण से कुछ नकली इच्छाधारी बाबा बन कर भोले-भाले लोगों को अपने मायाजाल में फंसा लेते हैं। वैसे भी हमारे देश की एक कड़वी सच्चाई यह भी हैं कि जो लोग पढ़ाई में सदैव अव्वल रहते हैं वो डॉक्टर या इंजीनियर बनते हैं। उससे कुछ कम अंक पाने वाले किसी न किसी सरकारी दफ्तर में अफसर या बाबू बन जाते हैं। पढ़ाई में इससे नीचे रहने वाले कोई अपना छोटा-मोटा कारोबार षुरू कर लेते हैं। इन सभी लोगों के बाद एक श्रेणी उन लोगों की होती हैं जो अपनी स्कूल की पढ़ाई भी ठीक से पूरी नही कर पाते। ऐसे लोग किसी न किसी छल फरेब की आड़ लेकर फर्जी बाबा बन जाते हैं। इसके साथ ही यह लोग छल, कपट और झूठ का ऐसा खेल खेलना शुरू करते हैं कि ऊपर लिखी हुई सभी श्रेणियों के लोग ऐसे बाबाओं के पैर पकड़ने लगते हैं।
आऐ दिन इस तरह के बाबाओं के अजीबों-गरीब किस्से देख कर हम सभी इन के सैंकड़ों दोष तो निकालते रहते हैं। लेकिन क्या हमने कभी यह सोचने की कोशिश की हैं कि यह बाबा किसी को अपने पास बुलाने के लिये न तो किसी से कोई जोर-जबरदस्ती करते हैं और न ही किसी पर दबाव बना कर उन्हें घर से बुलाते हैं। हैरान करने वाली बात तो यह हैं कि इन सारी बातों के बावजूद भी हर वर्ग के गरीब-अमीर, सतंरी एवं मंत्री भी इनके झासें में कैसे फंस जाते हैं। कुछ मनोचिकित्सकों का यह मानना हैं कि आमतौर पर हमारे समाज में हम लोग कभी धर्म, कभी जाति के नाम पर एक दूसरे से भेदभाव करते रहते हैं। इतना ही नही बल्कि कई छोटी-बड़ी बातों को लेकर दूसरे लोगों की भावनाओं को ठेस भी पहुंचाते रहते हैं। इसी तरह कुछ औरतों को घर में प्यार और इज्जत नही मिलती। उनके साथ आऐ दिन मार-पिटाई और घरेलू हिंसाओं की घटनाऐं होती रहती हैं। कुछ लोग यह सब कुछ इसलिये करते हैं क्योंकि वो पैसे और बल के अहंकार में डूब कर यह भी भूल जाते हैं कि भगवान ने हम सभी को एक जैसा बनाया हैं। हमें हर किसी के साथ इज्जत से पेश आना चाहिए। जबकि नेक इंसान होने के नाते हमें सदा यह याद रखना चाहिए कि हमारा सबसे पहला और बड़ा धर्म इंसानियत का हैं।
अब जो लोग इस तरह के मुश्किल समय में डर के साये में जी रहे होते हैं उनके लिये सहानुभूति के दो बोलों की अहमियत को आसानी से समझा जा सकता हैं। आम आदमी की इन्ही परेशानियों का फायदा उठाते हुए घोटलेबाज़ बाबा उन्हें बहका कर अपने मायाजाल में लपेट लेते हैं। जैसे ही भक्त लोग इनके थोड़ा करीब आना शुरू होते हैं यह अपनी लच्छेदार बातों से उन के दिल और दिमाग को काबू में करने लगते हैं। साधारण लोगों के साथ हमदर्दी जताते हुए इस तरह के बाबा यह दावा करते हैं कि उन के पास कई जादुई शक्तिया हैं, जिसकी बदौलत वो हर किसी का भाग्य बदल सकते हैं। उनकी हर समस्या का हल सिर्फ यही बाबा ही कर सकते हैं। ऐसी छल-फरेब वाली बातों से यह बहुत सारे लोगों को अपना गुलाम बनाते रहते हैं। एक कुशल शिकारी की तरह जैसे ही शिकार इनकी गिरफ्त में आ जाता हैं यह धीरे-धीरे उससे पैसा, सम्पति आदि सब कुछ छीनने लगते हैं। ढ़ोगी और फरेबी बाबाओं का हौसंला इसलिये भी बढ़ता रहता हैं क्योंकि हमारे देश का कानून और सरकारें इन के धधें में किसी किस्म की रोक-टोक नही करती। वैसे भी यह लोग आऐ दिन कोई न कोई ऐसा पाखंड खड़ा करते रहते हैं जिससे मीडिया में भी इनकी अच्छी खासी पकड़ बनी रहती हैं।
अंधविश्वास के चलते यह ढ़ोंगी बाबा हमें जो भी हुक्म सुनाते हैं हम आखें मूंद कर उस पर विश्वास करने लगते हैं। मज़े की बात तो यह हैं कि कई बार हम जादू-टोने वाले ऐसे देवियों और बाबाओं के चक्कर में फंस जाते हैं जिन्हें हमारी परेशानी के बारें में मूलभूत जानकारी भी नही होती। लेकिन दूसरी और वो पूरे विष्वास के साथ उस समस्या को हल करने का दावा ठोकते हैं। एक मिनट के लिये मान लिया जायें कि किसी व्यापारी के सिर पर अगर बैंक का कर्ज हैं तो यह उसे हुक्म सुना देते हैं कि अमावस की रात को पीपल के पेड़ के नीचे कुछ मिठाई, फल आदि रख कर आओ। अब ऐसे लोगों से कोई पूछे कि जिस इंसान के सिर पर बैंक का कर्ज हैं अगर वो पीपल के पेड़ के नीचे कुछ सामान आदि रख भी आयेगा तो क्या उससे बैंक मैनेजर खुश हो जायेगा। इतना करने से क्या बैंक वाले हमारा कर्ज़ माफ कर देगे। इसी तरह कुछ बाबा किसी को अपने आश्रम में कमरे बनवाने के लिये कह देते हैं। अब अगर हम किसी तरह से आश्रम में कमरे बनवा भी देगे तो उससे हमारी समस्या कैसे हल होगी। इस तरह के विषयों पर चर्चा तो बहुत लबें अरसे से हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद भी फर्जी बाबाओं का मायाजाल तेजी से फैलता ही जा रहा हैं। ऐसी बुराईयों को खत्म करने के लिये आज भी समाज में जागरूकता की बहुत बड़ी कमी दिखाई देती हैं। जबकि आज समय की मांग हैं कि इस प्रकार के मायाजाल बुनने वाले बाबाओं के खिलाफ जल्द से जल्द सर्जिकल स्ट्राइक की जाऐं। इन विचारों से सहमति जताते हुए जौली अंकल की भी यही राय हैं कि जब तक हम सभी मिल कर साधू-संतों के भेस में छिपे ऐसे ढ़ोगियों की पोल खोलना शुरू नही करेगे उस समय तक इस मायाजाल को खत्म नही किया जा सकता।

-जौली अंकल – 9810064112

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